Friday, 9 December 2016

राहत-ए-जम-जम

राहत-ए-जम-जम
नक्कारखाना
फत्ते मियां भारतीय अर्थव्यवस्था की तरह गिरते-हांफतेाीमार दोस्त छेदीलाल की चौखट पर जा धमके। कलेजा मुंह को आ रहा था लेकिनाात ही कुछ ऐसी थी। दूर से ही विपक्षी नेता की तरह चिल्लाए, छेदी ओ छेदी। लेोटा, तेरे तोाुरे दिन कट गए। खाट पर उकड़ूौठ छेदी फुसफुसाया, अरे कुछ उगल तो सही। फत्ते ढांढ़सांधाने के अंदाज मेंोला, सरकार ने सूखा राहत की घोषणा कर दी है।ास कभी भी यहां पहुंच सकती है। तेरा जिला सूखा घोषित हो गया है क्योंकि यहां 50 फीसदी से कमाारिश हुई है। सो तेरा तो जुगाड़ हो गया। फिर योगीाााा की तरह जोर की सांस खींचकरोला, लेकिन छेदी यार हमास 0.5 अंक से पिछड़ गए। ऊपर वाले को शायद यही मंजूर था।ास इत्ती सी कमाारिश होती तो थोड़ीाहुत राहत हमारी झोली में आ जाती। भाग्य अपना-अपना। आाारिश तो जात-पात, धर्म-कर्म या सरहद देखकर आती नहीं।
यह सुन छेदी को मानो करंट लग गया हो। राखी सावंत के अंदाज में भड़क उठा।ोला, राहत गई तेल लेने। यहां जान को अटकी है और तुझे मजाक सूझ रहा। अरे चारााचा नहीं।ोई फसल को सूखा गटक गया। दवाई तक के लाले हैं। तू तो ऐसे खुश हो रहा है जैसे रियलिटी शो के अभिनेता कि जंगल पहुंचे नहीं और मिल गए पचास लाख। सरकारी फरमार ही तो जारी हुआ है ना। आ देखना पहले स्टेट घोषणा करेगा। डीएम अधिकारियों को दौड़ाएगा। अधिकारी गांव-गांव दौरा कर रिपोर्ट लिखेंगे। रिपोर्ट स्टेट हेडक्र्वाटर जाएगी वहां से केंद्र।ौठकों का दौर चलेगा, पैसा रिलीज होगा फिर उसी चैनल से वापस आएगा। कितना और का पहुंचेगा यह तो पहुंचाने वाला भी नहीं जानता। ता तक तो मियां दिवाला निकल चुका होगा। और फत्ते मियां पिछले सूखे का मंजर तो देख चुके हो।ौंक एकाउंट के लिए 100 का नोट चाहिए और राहत का चेक आया था 17, 50 व 70 रुपए का।
सरकारानाने में की तिकड़म का गणित हमेशा नेता सही लगाते हैं लेकिन राहत के गणित में उनकी याददाश्त शायद घास चरने चली जाती है। जा संकट खुद पर आए तो संसद तक में जूते उछालने से नहीं चूकते। आ स्वाइन फ्लू को ही देख लो। अमीर कीाीमारी है सो सरकार सिर केाल दिन-रात टिटहरीान खड़ी है।ााढ़ और हर सालाारिश केााद ऐसे इलाकों में दिमागीाुखार और हैजे से कई सैकड़ा लोग औराच्चे मरते हैं उस पर कोई शोर-शरााा नहीं होता। लेकिन घाराओ नहीं दोस्त, हिसाा तो सभी को यहीं देना होता है।

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